देहरादून, 2 अप्रैल 2025: उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब तक विभागीय पदोन्नति से ही प्रधानाचार्य के पद भरे जाते थे, लेकिन अब सहायक अध्यापक (एलटी) भी विभागीय सीधी भर्ती के माध्यम से इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य बन सकेंगे। इस बदलाव के लिए राज्य सरकार अब कैबिनेट में प्रस्ताव लाने जा रही है, जो शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार जल्द ही मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
राज्य में प्रधानाचार्यों के पदों की स्थिति
प्रदेश के सरकारी इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के 1385 पदों में से 1101 पद फिलहाल खाली हैं, यानी करीब 79 प्रतिशत पदों पर कोई प्रधानाचार्य नहीं हैं। यही स्थिति प्रधानाध्यापकों की भी है, जहां 910 में से मात्र 122 पद ही भरे हुए हैं। बाकी 788 पद पिछले कई सालों से खाली पड़े हैं। इस वजह से विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा है और शिक्षा की गुणवत्ता में कमी आ रही है।
पद | कुल पद | खाली पद | प्रतिशत (%) |
---|---|---|---|
प्रधानाचार्य | 1385 | 1101 | 79% |
प्रधानाध्यापक | 910 | 788 | 86% |
विभागीय सीधी भर्ती का प्रस्ताव
अब तक विभागीय पदोन्नति के माध्यम से इन खाली पदों को भरा जाता था, लेकिन वर्तमान में पदोन्नति प्रक्रिया में देरी और मुद्दों के कारण यह पद खाली पड़े हुए हैं। इस कारण सरकार ने विभागीय सीधी भर्ती के द्वारा प्रधानाचार्य के पदों को भरने का निर्णय लिया है।
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शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है कि विभागीय सीधी भर्ती के जरिए इन खाली पदों को भरा जाएगा। इसके लिए एक प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया में सहायक अध्यापक (एलटी) को भी शामिल किया जाएगा, जिन्हें पहले भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखा गया था।
सहायक अध्यापक (एलटी) के लिए यह क्या मायने रखता है?
पहले विभागीय सीधी भर्ती में सहायक अध्यापक (एलटी) शिक्षकों को बाहर रखा गया था, जबकि 50 साल तक के प्रवक्ताओं को भर्ती के लिए पात्र माना गया था। इससे नाराज शिक्षकों ने आंदोलन किया और कुछ सहायक अध्यापक एलटी ने कोर्ट में भी मामला दायर किया। इसके बाद राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्ती को स्थगित कर दिया गया था।
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अब सरकार ने फैसला लिया है कि सहायक अध्यापक एलटी को भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए इन शिक्षकों को कम से कम 10 से 15 वर्षों की सेवा का अनुभव होना अनिवार्य होगा।
शिक्षकों की प्रतिक्रिया
शिक्षकों की अलग-अलग राय है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि प्रधानाचार्य के पदों पर पदोन्नति से ही भर्ती होनी चाहिए, क्योंकि यह पद पहले से पदोन्नति के द्वारा भरे जाते रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य शिक्षकों का यह भी कहना है कि सहायक अध्यापक एलटी को भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि योग्य और अनुभवशाली शिक्षक प्रधानाचार्य के पदों पर कार्य कर सकें।
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शिक्षा मंत्री की बात
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, "प्रधानाचार्य के पदों को भरने के लिए विभागीय सीधी भर्ती की जाएगी, जिसमें सहायक अध्यापक एलटी शिक्षकों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उम्मीदवारों के पास कम से कम 10 या 15 साल की सेवा का अनुभव हो।"
यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे ना केवल शिक्षकों को नए अवसर मिलेंगे, बल्कि विद्यालयों में प्रधानाचार्य की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।
यह कदम शिक्षा विभाग में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर नेतृत्व और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।