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Kailash Parvat View | Photo: UHN Media |
कैलाश पर्वत की चोटी पर आज तक कोई भी पर्वतारोही नहीं पहुँच पाया है। इस असंभव से दिखने वाले कार्य के पीछे आखिर क्या कारण है? क्यों कोई कैलाश पर्वत की चोटी पर नहीं पहुँच पाता? आखिर वह क्या रहस्य है जिसके कारण एवरेस्ट से कम ऊंचाई होने पर भी इस पर्वत शृंखला को नहीं फतह किया जा सका है।
इस पोस्ट के जरिए उत्तराखंडहिन्दीन्यूज की टीम ने कैलाश पर्वत से जुड़ी जानकारियों का संकलन किया है। ये जानकारियाँ कैलाश पर्वत के रहस्यों को काफी हद तक उजागर कर पायेगी। साथ-ही-साथ आपके इन सवालों का उत्तर देने में भी सहायक होगी।
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आखिर क्या है कैलाश पर्वत का रहस्य?
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। साथ ही इस पर्वत को रहस्यमयी, गुप्त और पवित्र माना गया है। इसलिए इसकी परिक्रमा करना शुभ और कल्याणकारी मानी गई है।
कैलाश पर्वत के बारे में तिब्बत मंदिरों के धर्म गुरु बताते हैं कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का निरंतर प्रवाह होता रहता है।
हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं बोन यह 4 प्रमुख धर्म हैं जो मानते हैं कि कैलाश पर्वत न केवल एक तीर्थ स्थान है, अपितु धरती का सबसे पवित्र स्थान है। इसका प्रमुख कारण उनकी आस्था अनुसार उनके आराध्य की इस पर्वत पर उपस्थिति मानी गई है।
प्राचीन तिब्बती किवदंतियों और लेखों के अनुसार, “किसी भी नश्वर को कभी भी कैलाश पर्वत पर चलने की अनुमति नहीं दी जाती है, यहाँ बादलों के बीच, देवताओं का निवास है। वह व्यक्ति जो इस पवित्र पर्वत की चोटी पर चढ़ाई शुरू करता है और मानवीय देह से देवताओं के दिव्य स्वरूप को देखने का प्रयत्न करता है, उन्हें मृत्यु प्राप्त होती है।
कैलाश पर्वत पर चढ़ाई के विषय में क्या कहते हैं लोगों के अनुभव?
सन 1926 में एक प्रसिद्ध इंग्लिश पर्वतरोही हयूज रट्टलेज (Hugh Ruttledge) ने इस पर्वत के उत्तरी मुख का अध्ययन किया और बताया की यह "पर्वतारोहण की दृष्टि से पूर्णतः असंभव है"।
कैलाश पर्वत के शिखर पर चढ़ने की कोशिश करने वाले कई पर्वतारोहियों में से एक Colonel RC Wilson ने बताया कि “जब उन्हें यह अहसास हुआ कि यात्रा सरल हो चुकी है, तभी अचानक से तेज़ बर्फबारी ने उनका यह काम असंभव कर दिया।”
प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई लेखक और पर्वतारोही हर्बर्ट टिची (Herbert Tichy) ने 1936 में इस क्षेत्र का पता लगाया था। उन्होंने एक स्थानीय लामा से कैलाश पर्वत पर चढ़ने के बारे में पूछने का जिक्र किया है।
लामा ने जवाब दिया, "केवल एक पाप रहित व्यक्ति ही कैलाश पर चढ़ सकता है। और उसे वास्तव में बर्फ की खड़ी दीवारों पर चढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी - वह खुद को एक पक्षी में बदल देगा और शिखर पर उड़ जाएगा।"
1980 के दशक तक किसी को भी पर्वत पर चढ़ने की औपचारिक अनुमति नहीं दी गई थी।
माउंट एवरेस्ट पर अकेले और बिना परिपूरक ऑक्सीजन के चढ़ने वाले पहले व्यक्ति रेनहोल्ड मेसनर (Reinhold Messner), को जब यह अवसर दिया गया था, उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया, "अगर हम इस पर्वत को जीत लेते हैं, तो हम लोगों की आत्माओं में बहुत कुछ जीत लेते हैं।"
एक रूसी पर्वतारोही सर्गेई सिस्टियाकोव (Sergei Cistiakov), ने कैलाश पर न चढ़ पाने का एक चौंकाने वाला तर्क दिया। उनके अनुसार "जब हम पहाड़ के आधार के समीप पहुंचे, तो मेरा दिल तेजी धड़कने लगा। मैं पवित्र पर्वत के सामने था, जो मुझसे कह रहे थे कि ‘हमें हराना असंभव है’। जिसके बाद मैं खुद को दुर्बल महसूस करने लगा और उस वातावरण में मुग्ध हो गया।
धीरे-धीरे जैसे हमने उतरना शुरू किया, मुझे मुक्ति महसूस होने लगी। दिल की धड़कन सामान्य होने लगी। मानो कैलाश पर्वत पर ऊपर आप मानवीय क्षमता के साथ नहीं जा सकते।
जो लोग इस पर्वत के आस-पास के क्षेत्र का दौरा करते हैं, वह अपने नाखूनों और बालों में 12 घंटों के भीतर असामान्य लंबाई महसूस करते हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में 2 सप्ताह में होता है!
ऐसा माना जाता है कि पहाड़ में एक हवा है जो तेजी से बुढ़ापे का कारण बनती है।
कुछ रूसी वैज्ञानिकों ने बहुत हद तक पहाड़ का अध्ययन किया है और इस विचार को सामने रखा है कि कैलाश पर्वत एक मानव निर्मित पिरामिड हो सकता है, और यह बहुत बड़ी असामान्य घटना हो सकती है जो दुनिया के अन्य सभी ऐसे स्मारकों को जोड़ती है जहां ऐसी ही असामान्य चीजें हुई हैं।
2001 में, एक स्पेनिश टीम द्वारा चोटी पर चढ़ने की योजना की विवादास्पद कहानियाँ सामने आईं। इसके कारण चीनी सरकार ने पवित्र पर्वत के शिखर पर चढ़ने के प्रयास पर औपचारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया।
क्यों असंभव है कैलाश पर्वत की चोटी पर पहुंचना?
हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। भगवान शिव मोक्ष और मुक्ति के दाता हैं, उनको विभिन्न धर्मों में विभिन्न रूपों में पूजा जाता रहा है।
भगवान शिव के निवास स्थान और उन तक कोई भी मानव इस पापमय मन और निकृष्ट शरीर से नहीं पहुँच सकता, इसका कारण उस आलौकिक शक्ति की क्षमता को न सहन कर पाना है।
इसलिए जब कोई कैलाश पर्वत चढ़ता है तो थोड़ा सा ऊपर जाने पर ही वह दिशाहीन हो जाता है। अब क्योंकि कोई भी बिना दिशा के चढ़ाई नहीं कर सकता, इसीलिए कोई भी आगे नहीं बढ़ पाता।
बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म में ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार कैलाश पर्वत मेरु/सुमेरु ब्रह्मांड का आध्यात्मिक केंद्र है।
कैलाश पर्वत पर आज तक कौन पहुंच पाया?
कैलाश पर्वत को दुनिया का केंद्र माना जाता है जहाँ पृथ्वी और स्वर्ग के बीच, भौतिक दुनिया और आध्यात्मिक दुनिया के बीच धरती से स्वर्ग का मिलन होता है।
इस पवित्र पर्वत की ऊंचाई 6,638 मीटर है. इस प्रकार, कैलाश पर्वत माउंट एवरेस्ट से लगभग 2210.86 मीटर छोटा है।
इसकी चोटी की आकृति विराट शिवलिंग की तरह है, जिस पर सालों भर बर्फ की सफेद चादर लिपटी रहती है.
कैलाश पर्वत पर चढ़ना निषिद्ध माना जाता है परन्तु 11 सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर सफलता पूर्वक चढ़ाई की थी।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऊंचाई में अंतर के बावजूद, कैलाश पर्वत चढ़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करता है। इसकी अनूठी भौगोलिक संरचना, मौसम की स्थिति और सांस्कृतिक महत्व इसे पर्वतारोहियों के लिए एक कठिन और असामान्य चुनौती बनाते हैं।
कई अध्ययनों एवं तथ्यों के उपरांत भी आज तक कोई भी कैलाश पर्वत न चढ़े जाने का सटीक कारण नहीं बता पाया है।
6638 कि ऊंचाई को भी फतह करने में क्या अड़चने आ रहीं हैं यह कोई नहीं जनता। किन्तु यह भी बात सही है कि कुछ चीजों को रहस्य ही रहने दें तो ही अच्छा।
कैलाश पर्वत पर अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर
यह लेख पढ़ने के पश्चात आपके मन में विभिन्न प्रश्न आए होंगे, जैसे:
- Kailash Parvat Kahan Hai - कैलाश पर्वत कहाँ है?
- ये है कैलाश पर्वत के राक्षस ताल की कथा, इस कारण यहां नहाने से किया जाता है मना
- Facts About Mount Kailash: भगवान शिव के निवास के बारे में रहस्यमयी बातें
हम आशा करते हैं की आपको यह लेख पसंद आया होगा, जिसमें हमने कैलाश पर्वत पर विस्तृत चर्चा की और जाना की आखिर क्यों असंभव है कैलाश पर्वत की पर चढ़ाई करना।
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Bahaut Khoon likha hai, aapne aagar kabhi samay mila to jarur Kailash Yatra par Jaungi.
ReplyDeleteबहुत अच्छा लिखा है सर, मुझे कैलाश पर्वत पर लेख अच्छे लगते हैं
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